टोंक। रालसा के दिशा-निर्देशों के अंतर्गत जनोपयोगी सेवाओं से संबंधित समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण के उद्देश्य से पूरे प्रदेश में तीन माह की अवधि के लिए ‘‘न्याय आपके द्वार’’ नामक विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। इसी श्रृंखला में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण टोंक द्वारा अधिवक्ताओं के लिए एक विस्तृत क्षमतावर्धन कार्यक्रम एवं विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन जिला बार एसोसिएशन के मीटिंग हॉल में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यक्रम का संचालन चीफ एल.ए.डी.सी. रमेश शर्मा द्वारा किया गया, जिन्होंने अभियान के महत्व एवं विधिक समुदाय की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कार्यक्रम का संचालन किया। अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण टोंक के सचिव दिनेश कुमार जलुथरिया ने अपने विस्तृत संबोधन में कहा कि रालसा द्वारा प्रारम्भ यह विशेष अभियान आमजन को बिजली, पानी, परिवहन, बैंकिंग, बीमा, नगर निकाय, स्वास्थ्य, यात्रा सुविधा जैसी जीवनोपयोगी अनिवार्य सेवाओं से संबंधित समस्याओं के समाधान हेतु एक सशक्त मंच प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य तकनीक के माध्यम से नागरिकों की समस्याओं को सरल, पारदर्शी और शीघ्र प्रक्रिया द्वारा निस्तारित करना है, ताकि कोई भी व्यक्ति अपनी दैनिक उपयोग की सेवाओं से जुड़े विवाद या समस्या को बिना विलंब एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर दर्ज कर सके। उन्होंने विस्तार से बताया कि नागरिक अपनी शिकायत रालसा के अधिकृत व्हाट्सएप नंबर 9119365734 पर संदेश भेजकर, नालसा हेल्पलाइन 15100 पर कॉल करके, मोबाइल नंबर 9928900900 अथवा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण फ्रंट ऑफिस 8306002139 पर संपर्क करके दर्ज करा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, कोई भी व्यक्ति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, टोंक कार्यालय में एक साधारण प्रार्थना पत्र भी दे सकता है। सभी प्राप्त शिकायतों पर 48 घंटे के भीतर कार्यवाही प्रारंभ की जाती है, जो आमजन को त्वरित न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने यह भी बताया कि इस अभियान के अंतर्गत संबंधित विभागों के माध्यम से सुलह एवं समाधान के प्रयास किए जाएंगे, ताकि समस्या का निस्तारण सहजरूप से विभाग स्तर पर ही हो सके। यदि समाधान संभव न हो पाए तो प्रकरण को स्थायी लोक अदालत में भेजा जाएगा, जहाँ नि:शुल्क अधिवक्ता सहायता उपलब्ध कराई जाती है। स्थायी लोक अदालत का निर्णय सिविल कोर्ट की डिक्री के समान प्रभावी होता है तथा इसके विरुद्ध अपील का कोई प्रावधान नहीं है, जिससे आमजन को त्वरित, अंतिम एवं प्रभावी समाधान प्राप्त होता है। कार्यक्रम में अधिवक्ताओं ने प्रश्न पूछे एवं इस अभियान की उपयोगिता पर सकारात्मक विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में एडवोकेट प्रमोद शर्मा, केदारमल गुर्जर, धीरज संगत, देवकरण गुर्जर, विनोद गुप्ता, बरदराज जाट सहित अनेक अधिवक्ताओं की उपस्थिति रहे। उल्लेखनीय रही। उपस्थित अधिवक्ताओं ने इस पहल का प्रचार प्रसार करने और अधिक से अधिक जनोपयोगी सेवाओं से संबंधित समस्याऐं दर्ज कराने का संकल्प लिया।
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