टोंक। फ्लूट लर्निंग स्कूल के प्रथम बैच के शिक्षार्थियों कृनिया राहा रजक, अशनीत, तेजस, गर्वित, सुहानी, राजवंती एवं सोनू ने बाल दिवस के अवसर पर एक्सपेरिमेंटल स्टूडियो में ‘‘मैथमैटिकल विंड’’ शीर्षक से सामूहिक बाँसुरी वादन की प्रभावशाली प्रस्तुति दी। इस अवसर पर सभी विद्यार्थियों ने अपनी संगीत यात्रा के अनुभव भी दर्शकों के साथ साझा किए।फ्लूट लर्निंग स्कूल प्रतिमाह सार्वजनिक प्रस्तुतियों का आयोजन करता है, जिसके माध्यम से विद्यार्थी अपने सीखने की प्रक्रिया तथा संगीत अभिव्यक्ति को समुदाय के साथ साझा करते हैं। कम्युनिटी थिएटर टोंक सोसायटी के मोहित वैष्णव ने बताया कि लूट लर्निंग स्कूल की स्थापना 10 अक्टूबर को टोंक में अवधेश कुमार पटेल द्वारा राजकुमार रजक के निर्देशन तथा मार्गदर्शन में की गई। यह संस्थान बच्चों में संगीत की समझ के साथ-साथ गणितीय कल्पनाशीलता, मानवीय संवेदनशीलता एवं सौंदर्यबोध विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में उल्लिखित कला-शिक्षा दक्षताओं को आधार बनाकर ‘‘हारमोनी होराइजऩ’’ कार्यक्रम विकसित किया गया है, जिसका पाठ्यक्रम तीन चरणों में विभाजित है। रिदम रूट (प्रारम्भिक स्तर) संगीत के मूल तत्त्वों से परिचय, समूह में सामंजस्य तथा गणितीय सोच का विकास, मेलोडी इन मोशन (माध्यमिक स्तर) विभिन्न रागों तथा तालों का अध्ययन। मास्टरी ऑफ हारमोनी उच्च स्तर स्वतंत्र संगीत रचना तथाऔर प्रस्तुति की तैयारी। लूट लर्निंग स्कूल का उद्देश्य बच्चों में स्वयं एवं समाज के प्रति संवेदनशील संबंध विकसित करना है। 21वीं सदी की विशेष कौशल आवश्यकताओं के अनुरूप यह स्कूल सुनने, महसूस करने, रचनात्मकता, भावनात्मक जागरूकता तथा सामूहिक नेतृत्व जैसी क्षमताओं को सशक्त बनाता है। आज की शिक्षा में संगीत केवल मनोरंजन या प्रस्तुति का माध्यम नहीं, बल्कि तार्किक सोच, संज्ञानात्मक क्षमता, भावनात्मक बुद्धिमत्ता एवं सामाजिक संवेदनशीलता को विकसित करने का प्रभावी उपकरण बन चुका है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 सहित वैश्विक शिक्षा नीतियाँ कला को मुख्य विषयों के साथ जोडऩे पर बल देती हैं, जिससे गहन समझ, रचनात्मकता तथा नागरिक मूल्यों का विकास होता है।फ्लूट लर्निंग स्कूल के संस्थापक अवधेश कुमार पटेल ने भारतीय शास्त्रीय संगीत की शिक्षा पं. रवि शंकर इलाहाबाद से प्राप्त की। गणित में स्नातक तथा ड्रामा एवं प्राचीन भारतीय इतिहास एवं संस्कृति में परास्नातक अवधेश ने उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान के कई विद्यालयों में दृश्य तथा प्रदर्शन कलाओं के माध्यम से बच्चों की रचनात्मकता, कल्पनाशीलता एवं विश्लेषणात्मक समझ को विकसित करने का उल्लेखनीय कार्य किया है। लंबे समय से रंगमंच तथा संगीत से जुड़े अवधेश कुमार अब अपनी कला, अनुभव एवं शैक्षणिक दृष्टि को फ्लूट लर्निंग स्कूल के माध्यम से बच्चों तक पहुँचा रहे हैं।
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