टोंक। कम लागत में कीट व्याधि के प्रभावी नियंत्रण हेतु बीज उपचारित कर बुवाई करें। बीज उपचार एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसमें बीजों को बुवाई से पहले रसायनों, जैविक एजेंटो या पोषक तत्वों से उपचारित किया जाता है। बीज उपचार करने से बीज अंकुरण क्षमता में वृद्वि के साथ पौधों को प्रारम्भिक अवस्था में जड गलन व अन्य रोगों व कीटों सें बीज की सुरक्षा होती है और जैव उर्वरकों (कल्चर) सें उपचारित करने से पौधों को पोषक तत्व की आपुर्ति के कारण पौधों की बढवार एवं पैदावार में बढोतरी होती है। बीज उपचार कृषकों के लिए कम लागत में ज्यादा लाभ देने वाला उपाय है। बीज उपचार करते समय सर्वप्रथम फफुंदनाशी, फिर किटनाशी तथा कल्चर से किया जाता है। कृषि विभाग द्वारा फसलों में उत्पादकता बढानें के लिए जिले में बीजोपचार का विशेष अभियान 1 नवम्बर से आयोजित किया जायेगा जिसमें विभाग के कार्मिको द्वारा कृषको को बीजोपचार का महत्व बताते हुए बीजोपचार का प्रायोगिक जानकारी दी जायेगी। फसलों को रोगों व किटों सें बचाने के लिए विभागीय सिफारिश अनुसार बीजोपचार अवश्य करें।
चने में जड गलन, सुखा जड गलन एवं उकटा नियंत्रण 1 ग्राम कार्बेन्डाजिम एवं ढाई ग्राम थाईरम या 10 ग्राम ट्राइकोर्डमा प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करें। जिन खेतों में दीमक या कटवर्म का प्रकोप हो वहां फिप्रोनिल 5 एस.सी 10 मि.ली. या इमिडाक्लोप्रिड 600 एफ.एस 5 मि.ली. प्रति किलों बीज की दर से उपचारित करें। बीज को प्रति है. 3 पैकेट या 500 मि.ली. तरल राईजोबियम कल्चर से उपचारित कर बुवाई करें।
गैंहु में बीजोड रोगो से बचाव हेतु 2 ग्राम थाईरम या ढाई ग्राम मेन्कोजेब प्रति किलो बीज की दर से बीज उपचारित कर बुवाई करें। जिन खेतों में अनावृत्त कण्डवा एवं पत्ती कण्डवा रोग का प्रकोप हों वहां 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम या कार्बोक्सीन प्रति किलों बीज की दर से बीज उपचारित करें । गंेहु में दीमक या कटवर्म के निंयत्रण के लिए फिप्रोनिल 5 एस.सी 10 मि. ली. या इमिडाक्लोप्रिड 600 एफ.एस 5 मि.ली. प्रति किलों बीज की दर से उपचारित करें। अन्त में एजेटोबेक्टर जीवाणु कल्चर के तीन पैकेट प्रति हैक्टर क्षेत्र के बीज को उपचारित कर बुवाई करें
फसलों में वैज्ञानिक तरीके से बीज उपचार करने के लिए जिले के सभी ग्राम पंचायतों में सीड ड्रेसींग ड्रम उपलब्ध कराया गया है। किसान भाई अपना बीज एवं दवा ग्राम पंचायत में ले जाकर निःशुल्क बीज उपचार कर सकते है।
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अधिक उत्पादन के लिए बीजोपचार अवश्य करें
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