
निवाई(संवाददाता:लक्ष्मीचन्द शर्मा)। अतिशय क्षेत्र सहस्त्रकूट विज्ञातीर्थ गुन्सी में विराजित आर्यिका ज्ञानश्री माताजी के सानिध्य में प्रात: काल श्रद्धालुओं द्वारा भगवान शांतिनाथ का अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजा अर्चना की गई। विज्ञातीर्थ के कार्य अध्यक्ष सुनिल भाणजा ने बताया कि भगवान शांतिनाथ विधान का आयोजन किया गया। इस दौरान माताजी ने कहा कि व्यक्ति को कुछ समय परमात्मा के सुमिरन के लिए निकालना चाहिए। हमें अपनी पूरी उम्र दुनियदारी के कामों में नहीं बिताना चाहिए। उन्होंने कहा कि इंसान अपना खानपान शुद्ध रखे। जो व्यक्ति शुद्ध खानपान रखता है, उसकी सोच व विचार शुद्ध होते हैं। उन्होंने कहा कि खानपान का असर हमारी सोच पर पड़ता है। इसलिए साधु संतों ने शराब, मांसाहारी भोजन से दूर रहने का संदेश दिया है। हम जैसा खाना खाते हैं, उसका असर हमारे विचारों पर पड़ता है। अगर भोजन शुद्ध, सात्विक और शांतिपूर्ण हो तो मन भी शांत और सकारात्मक होता है। इसके विपरित अगर भोजन क्रूरता से बना हुआ हो जैसे कि मांसाहारी भोजन, तो मन में भी क्रूरता और नकारात्मकता आती है।
अगर भोजन ईमानदारी की कमाई से खरीदा गया हो तो मन में अच्छे विचार आते हैं। अगर बेईमानी या शोषण के पैसों से प्राप्त किया गया भोजन खाया जाए तो यह हमारे मन को दूषित कर सकता है और नकारात्मक विचार पैदा कर सकता है। इस अवसर पर पारस चैनपुरा, शैलेश संघी, लवीश जैन व राजेश झांझरी निवाई ने भगवान का अभिषेक किया।
