अष्टमी पर उमड़ा भक्तों का सैलाब
निवाई(संवाददाता:लक्ष्मीचन्द शर्मा)। गांव कांटोली में स्थित प्राचीन माँ भद्रकाली एवं शिव मंदिर में अष्टमी पर्व पर देवी माँ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। आश्रम के पीठाधीश्वर श्रीराम महाराज ने बताया कि मान्यता है कि यह मंदिर महाभारत काल से स्थापित है और युगों-युगों से यहाँ देवी माँ की आराधना होती आ रही है। उन्होंने बताया कि हाल ही में मंदिर का जीर्णोद्धार होने के बाद अब इसका स्वरूप और भी भव्य हो गया है। दूर-दराज के गांवों से आए श्रद्धालुओं ने माँ भद्रकाली के दर्शन कर अपनी श्रद्धा अर्पित की।
भक्तों का उमड़ा सैलाब
अष्टमी पर्व पर सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। दिन चढऩे के साथ वातावरण जय माँ भद्रकाली के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने मंदिर में पूजा-अर्चना कर माँ भद्रकाली व भगवान शिव का आशीर्वाद लिया। बताया जाता है कि इस दिन सैकड़ों भक्तों ने माँ की आराधना कर विशेष अनुष्ठानों में भाग लिया।
700 लोगों ने लिया नशामुक्ति का संकल्प
इस आयोजन की सबसे विशेष बात यह रही कि करीब 700 श्रद्धालुओं ने जीवनभर नशे से दूर रहने का संकल्प लिया। समाज में नशामुक्ति की यह पहल गाँव ही नहीं पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बनी। श्रीराम महाराज ने लोगों से आह्वान किया कि नशा मानव जीवन का सबसे बड़ा दुश्मन है और इसे त्यागकर ही सच्ची भक्ति और सुखमय जीवन संभव है।
जड़ी-बूटियों से हुआ रोगों का इलाज
अष्टमी पर्व पर आयोजित विशेष शिविर में प्राकृतिक व देशी जड़ी-बूटियों से रोगों का सफल उपचार किया गया। कैंसर, टी.बी., गठिया, सफेद दाग, अस्थमा, लकवा, पुरुष शक्ति एवं अन्य गंभीर बीमारियों से पीडि़त लोगों को यहाँ लाभ मिला। श्रद्धालुओं का मानना है कि माँ भद्रकाली के आशीर्वाद से ही यह उपचार सफल हो रहा है।
तंत्र-मंत्र और बाधाओं से मुक्ति
श्रद्धालुओं ने अनुभव साझा किया कि मंदिर परिसर में आने के बाद उन्हें गृह क्लेश, तंत्र-मंत्र, भूत-प्रेत बाधा और व्यापारिक समस्याओं से मुक्ति मिली। कई भक्तों का कहना था कि यहाँ आने से उनकी मनोकामनाएँ पूर्ण हुई हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ है।
श्रीराम महाराज का जनकल्याण कार्य
इस पूरे आयोजन की अगुवाई श्रीराम महाराज ने की। वह लंबे समय से जनकल्याण और सामाजिक उत्थान के कार्यों में सक्रिय हैं। महाराज का कहना है कि माँ भद्रकाली का यह मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं है, बल्कि यह समाज सुधार और जनसेवा का भी केन्द्र है। उनके प्रयासों से नशामुक्ति अभियान, रोग निवारण और सामाजिक समस्याओं का समाधान लगातार किया जा रहा है।

