विज्ञातीर्थ शान्तिनाथ जिनालय के वार्षिकोत्सव में उमड़े श्रद्धालु
निवाई। (संवाददाता:लक्ष्मीचन्द शर्मा)| श्री दिगंबर जैन समाज के तत्वावधान में श्री सहस्त्रकूट विज्ञातीर्थ का वार्षिकोत्सव कई धार्मिक अनुष्ठानों के साथ धमधाम से मनाया गया जिसमें श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। विज्ञातीर्थ कार्याध्यक्ष सुनील भाणजा ने बताया कि वार्षिकोत्सव को लेकर भगवान शांतिनाथजी का सामूहिक कलशाभिषेक किया गया। इस दौरान भगवान शांतिनाथजी का कलशाभिषेक व शान्तिधारा करने का सौभाग्य विज्ञाश्री युवा मंडल को मिला एवं माला पहनने का सौभाग्य चैनपुरा परिवार को मिला। कलशाभिषेक से पूर्व पंडित निर्मल जी सुनारा वाले के निर्देशन में शांतिनाथ मण्डल विधान की संगीतमय पूजा की गई। जिसमें श्रद्धालुओं ने जमकर भक्ति नृत्य किया। हितेश छाबड़ा व विमल जौंला ने बताया कि दसलक्षण पर्व में उपवास व्रत करने वाले त्यागियों का मंदिर कमेटी द्वारा माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। वार्षिकोत्सव की पूर्व संध्या पर भक्ताम्बर पाठ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ भगवान शांतिनाथजी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया। उसके बाद आर्यिका ज्ञानश्री माताजी ने धर्मसभा में संबोधित करते हुए कहा कि दान और त्याग दोनों अलग-अलग है, त्याग खोटी चीज का किया जाता है और दान अच्छी चीज का दिया जाता है, यही कहा जाता है की क्रोध छोड़ो मान, छोड़ो लोभ छोड़ो यह कोई नहीं कहता कि ज्ञान छोड़ो, माताजी ने बताया की माफी मांगकर यह साबित नहीं होता है कि हम गलत हैं और दूसरा नहीं, माफी का असली अर्थ है हम रिश्तो को निभाने की काबिलियत उससे ज्यादा रखते हैं, रिश्ते चाहे कितने भी बुरे हो कभी भी उन्हें मत तोडऩा, क्योंकि पानी कितना भी गंदा क्यों ना हो, प्यास ना सही आग तो बुझाता है। इस अवसर पर सुशील आरामशीन, विमल जैन, महावीर छाबड़ा, राजेंद्र बगड़ी, मनोज पाटनी, नरेश जैन, बंटी झांझरी, राजेश जैन, योगेंद्र सिंघल, महेंद्र जैन, ओमप्रकाश जैन, मुकेश जैन, डब्बू संघी व निशु झिलाय सहित कई श्रद्धालु मौजूद थे।

