सीपी राधाकृष्णन का उपराष्ट्रपति बनना सनातन विरोधियों को करारा जवाब भी।

एस.पी.मित्तल(ब्लॉगर)|9 सितंबर को जब पड़ोसी देश नेपाल में प्रधानमंत्री कार्यालय, सुप्रीम कोर्ट आदि बड़े संस्थानों की इमारतों पर आग लगा दी और सरकार के मंत्रियों को सरेआम घरों से निकालकर पीटा गया हो, तब भारत में उपराष्ट्रपति पद का चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया। नेपाल में जो अराजकता का माहौल है, वैसा ही पिछले दिनों बांग्लादेश में भी देखने को मिला। इससे पहले अफगानिस्तान और श्रीलंका में भी अराजकता देखी गई। यानी भारत के आसपास के देशों में लोकतंत्र का बुरा हाल है। पाकिस्तान में भले ही लोकतांत्रिक सरकार होने का दावा किया जा रहा हो, लेकिन सत्ता पर असली कब्जा सेना का है। चारों तरफ ऐसे अराजकता के माहौल में भारत में लोकतंत्र मजबूत स्थिति में है। 9 सितंबर को जब उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हुआ तो सभी विपक्षी दलों के सांसदों ने भाग लिया। लोकसभा और राज्यसभा के कुल 788 सांसदों में से 769 द्वारा मतदान में भाग लिया गया जो यह दर्शाता है कि भारत में लोकतंत्र कितना मजबूत है। असल में भारत में मौजूदा समय में सनातन संस्कृति के अनुरूप शासन चल रहा है। दुनिया में सनातन संस्कृति एकमात्र संस्कृति है, जिसमें दूसरे धर्म का सम्मान होता है। भारत में जब तक सत्ता में सनातन संस्कृति का प्रभाव रहेगा, तब तक लोकतंत्र भी मजबूत स्थिति में रहेगा। 9 सितंबर को दुनिया ने देखा कि नेपाल में किस तरह वामपंथी पार्टी के दफ्तर से झंडे उखाड़ फेंका गया। मौजूदा समय में नेपाल में वामपंथी विचारधारा को मानने वाले प्रधानमंत्री केपी ओली थे। वामपंथी विचारधारा ने नेपाल में जो हालात बनाए उसी का परिणाम रहा कि युवा वर्ग को सड़कों पर आना पड़ा। नेपाल में अब वामपंथी विचारधारा चूर चूर हो गई है। एक समय था जब नेपाल में भी सनातन संस्कृति का प्रभाव था, लेकिन चीन के दखल की वजह से सनातन संस्कृति को पीछे धकेल कर वामपंथी विचारधारा को हावी कर दिया गया। आज हालत यह है कि वामपंथी सरकार के प्रधानमंत्री और मंत्रियों को देश छोड़कर भागना पड़ रहा है।

सनातन विरोध को जवाब:
भारत में सीपी राधाकृष्णन का उपराष्ट्रपति बनना सनातन विरोधियों को भी जवाब है। भारत में भी सनातन संस्कृति विरोधी ताकतें सक्रिय हैं, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एनके स्टालिन और उनकी पार्टी डीएमके तो सनातन संस्कृति को नष्ट करना चाहते हैं। यह बात अलग है कि अब तमिलनाडु के निवासी राधाकृष्णन ही देश के उपराष्ट्रपति बने है। राधाकृष्णन बाल्यकाल से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे। तमिलनाडु में संघ और भाजपा की गतिविधियों को बढ़ाने में राधाकृष्णन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। भारत की सत्ता पर सनातन का कितना प्रभाव है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी संघ के प्रचारक रह चुके हैं। गत 15 अगस्त को ही पीएम मोदी ने लाल किले से संघ की प्रशंसा की। मोदी ने देश को एकजुट रखने में संघ के योगदान के बारे में देश को बताया, अब उपराष्ट्रपति भी ऐसे व्यक्ति बने हैं जो संघ के प्रचारक की भूमिका में रह चुके हैं। उपराष्ट्रपति के चुनाव में 769 में से 300 वोट संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी को मिलना बताता है कि भारत में विपक्ष भी मजबूत स्थिति में है। भले ही विपक्ष के 15 सांसदों ने क्रॉस वोटिंग की हो, लेकिन 300 वोट मिलना विपक्ष की मजबूती को भी दर्शाता है।

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