अपने कर्मों को काटने के लिए धर्म करना चाहिए-ज्ञानश्री माताजी
निवाई। सकल दिगंबर जैन समाज के तत्वावधान में श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन अग्रवाल मंदिर में दसलक्षण महापर्व के अंतिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य की पूजा अर्चना विधि विधान से की गई व वासुपूज्य भगवान का मोक्ष कल्याणक धूमधाम से मनाया गया। विज्ञातीर्थ कार्याध्यक्ष सुनील भाणजा ने बताया कि शनिवार को प्रात: काल सभी श्रद्धालुओं ने भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा कर पुण्यार्जन किया। उसके पश्चात अग्रवाल मंदिर में भगवान वासुपूज्य भगवान के मोक्ष कल्याणक पर लाडू चढ़ाने का सौभाग्य नरेंद्र कुमार, दिलीप कुमार, अमित, अमन, अनुज भाणजा परिवार को प्राप्त हुआ। विमल जौंला व हितेश छाबडा ने बताया कि विज्ञातीर्थ पर दसलक्षण विधान का आयोजन किया गया। जिसमें सोधर्म इंद्र राजेश कुमार, अभिषेक कुमार झिलाय ने मंडल पर अघ्र्य चढ़ाए। उन्होंने बताया कि दसलक्षण धर्म के अंतिम दिन श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन अग्रवाल मंदिर में श्रीजी की माला पहनने का सौभाग्य दिनेशकुमार, योगेन्द्र कुमार, जितेन्द्र कुमार झिलाय परिवार को प्राप्त हुआ। इस दौरान दशलक्षण विधान की पूर्णाहुति की गई जिसमें श्रद्धालुओं ने विश्व शांति महायज्ञ के हवन कुण्डो में आहुतियां दी। इसी प्रकार श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर व श्री दिगंबर जैन बिचला मंदिर में सामूहिक कलशाभिषेक किया गया। शाम को महाआरती करके सभी जिनालयों में धूमधाम से भक्तामर का पाठ किया गया। इस दौरान ज्ञानश्री माताजी ने प्रवचन में कहा कि महापर्व के अंतिम दिन सभी श्रद्धालुओं ने सामूहिक पूजा पाठ कर पुण्य का संचय किया लेकिन दस दिन ही नहीं हमेशा अपने अपने कर्मों को काटने के लिए धर्म करना चाहिए।

