प्राचीन ज्ञान और आधुनिक सततता का सेतु
संवाददाता:लक्ष्मीचंद शर्मा
निवाई। विश्व विख्यात वनस्थली विद्यापीठ में आयोजित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन हुआ। संगोष्ठी में ऊर्जा,जलवायु और सततता पर स्वदेशी दृष्टिकोण को केंद्र में रखा गया। इस अवसर पर शिक्षा, विज्ञान और नीति से जुड़े विशेषज्ञ एक मंच पर आए। एआईसीटीई वाणी योजना के अंतर्गत आयोजित इस संगोष्ठी का शीर्षक मंत्रों से लोकगीत तक ऊर्जा, जलवायु और सततता पर संस्कृत और मैथिली ज्ञान परंपरा की दृष्टि। इस आयोजन की शुरुआत विद्यापीठ की कुलपति प्रो. ईना आदित्य शास्त्री द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर एआई निदेशक डॉ. अंशुमान शास्त्री, रूसी दूतावास के अधिकारी, भारतीय रिज़र्व बैंक और एटॉमिक मिनरल निदेशालय के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

चर्चाओं का मुख्य विषय प्राचीन ज्ञान परंपरा को समकालीन चुनौतियों से जोडऩा रहा। संस्कृत और वैदिक विद्वान कृष्ण शर्मा ने वेद ज्ञान को वैज्ञानिक प्रयोगधर्मिता से जोडऩे की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं, शुभार्ती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रमोद कुमार शर्मा ने पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक शिक्षा व्यवस्था से जोडक़र नए उत्साह के साथ आगे बढ़ाने का आह्वान किया। एटॉमिक मिनरल निदेशालय से एस.के. शर्मा और उर्वशी सिंह ने परमाणु ऊर्जा को सतत विकास का अहम साधन बताया। जबकि भारतीय रिज़र्व बैंक की सहायक महा प्रबंधक मृदुला महेश्वरी ने युवाओं में वित्तीय जागरूकता और जिम्मेदारी को राष्ट्रीय प्रगति की आधारशिला बताया। संगोष्ठी में कार्यशालाएँ, व्याख्यान और संवाद सत्र भी शामिल रहे, जिनका उद्देश्य स्वदेशी परंपराओं और आधुनिक सततता दृष्टिकोण के बीच पुल बनाना था।

