
सिरोही, राजस्थान ।
( रिपोर्ट सुनील सिंघानिया, जावाल) ;
सिरोही में चोरियों का कोहराम: पुलिस-प्रशासन पर गहराता अविश्वास, एसपी के दावों पर सवाल ।
सिरोही, राजस्थान: सिरोही जिले में चोरों का बेखौफ राज कायम है, और इस अराजकता के बीच पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता ने जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया है। एक के बाद एक हो रही चोरी की वारदातों ने न केवल आमजन को भयभीत कर दिया है, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी और लापरवाही ने उन्हें कानून-व्यवस्था के प्रति अविश्वास के गहरे दलदल में धकेल दिया है। मनोरा से लेकर जामोतरा और अब जावाल तक, हर ओर दहशत का माहौल है और ग्रामीण रातें जागकर बिताने को मजबूर हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन गंभीर हालातों के बावजूद, सिरोही के पुलिस अधीक्षक (एसपी) पायरे लाल जिले में कानून-व्यवस्था को “बिल्कुल नियंत्रण में” बता रहे हैं, जो जमीनी हकीकत से कोसों दूर नज़र आता है।
मई 2025: मनोरा से शुरू हुआ चोरियों का सिलसिला
– पुलिस की शुरुआती उदासीनतासिरोही जिले में चोरियों का यह तांडव मई 2025 से ही शुरू हो गया था, और इसकी पहली बड़ी खबर मनोरा गांव से आई। मनोरा में तो स्थिति इतनी भयावह हो चुकी थी कि ग्रामीणों ने 31 मई, 2025 को सीधे जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी। उनके पत्र में विस्तृत रूप से बताया गया था कि 8 मार्च, 2025 को इष्टदेव श्री मनकेश्वर महादेव मंदिर में चोरी हुई थी, जिसमें शिवलिंग पर स्थित चांदी का नाग, छत्र और दानपात्र की नकदी चुराई गई। यह घटना धार्मिक आस्था पर सीधा प्रहार था।इसके बाद भी चोरों ने मनोरा में कई घरों और मंदिरों को निशाना बनाया, जिनमें सुंधा माता मंदिर, श्री हंसराज माली, श्री कस्तुजी, श्री माधुजी, श्री दुर्गेश जी और अन्य मंदिर व घर शामिल हैं, जहां से नकदी और कीमती सामान चुराया गया। सबसे शर्मनाक तो यह है कि 30 मई, 2025 की रात को चोरों ने बेखौफ होकर श्री मुकेश पुरोहित, श्री खीमजी पुरोहित और श्री नैनमलजी पुरोहित के घरों में सेंध लगाई और लाखों रुपये के सोने-चांदी के आभूषण व नकदी चुरा ली।
मनोरा के ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप था कि बरलूट थाना में इन चोरियों की रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद, महीनों का समय बीत जाने पर भी इन मामलों का कोई खुलासा नहीं हुआ था। पुलिस द्वारा 7 दिनों में खुलासा करने के खोखले आश्वासनों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होने से चोरों के हौसले इतने बुलंद हो चुके थे कि वे किसी का खौफ नहीं मान रहे थे।
ग्रामीणों ने तब चेतावनी दी थी कि यदि तीन दिनों के भीतर चोरियों का खुलासा नहीं होता और चोर पकड़े नहीं जाते, तो वे आमरण अनशन पर बैठने को मजबूर होंगे। यह पुलिस की शुरुआती उदासीनता का पहला बड़ा संकेत था, जब जनता को अपनी सुरक्षा के लिए खुद ही आवाज उठानी पड़ी।
“जुलाई 2025: जामोतरा में चोरों का धावा”
– पुलिस की बयानबाजी और जमीनी कार्रवाई का अंतरजुलाई 2025 तक आते-आते चोरों ने अपने पैर जामोतरा गांव में भी पसार लिए। 4 जुलाई, 2025 को जामोतरा में सरपंच पुत्र श्रवण कुमार के घी विक्रय कार्यालय को लोहे के सरिए से तोड़कर 50,000 रुपये नकद चुरा लिए गए थे। इस घटना के बाद थानाधिकारी जितेंद्र सिंह ने मामला दर्ज करने और सीसीटीवी फुटेज खंगालने की बात कही थी।लेकिन पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार का कोई संकेत नहीं मिला। इस घटना के ठीक दो दिन बाद, 6 जुलाई, 2025 की रात को जामोतरा में ही ईश्वर रावल और इंद्रमल रावल के दो बंद मकानों में बड़ी चोरी हुई। चोरों ने ताले तोड़कर लगभग 12 लाख रुपये के जेवरात, 1.10 लाख रुपये नकद और यहां तक कि एक मोटरसाइकिल भी चुरा ली। पूजा घर से चांदी की गाय और अन्य सामान भी गायब था। ग्रामीणों ने बताया कि चोर 7 फीट ऊंची दीवार फांदकर घुसे थे और दीवारों पर उनके पैरों के निशान भी थे। इन मामलों में पुलिस ने कुछ संदिग्धों को पकड़ने का दावा जरूर किया, लेकिन इन बड़ी और सनसनीखेज चोरियों का अब तक कोई ठोस और स्थायी खुलासा नहीं हो पाया है। यह स्थिति पुलिस की जांच प्रणाली की कमजोरी को उजागर करती है, जहां बयानबाजी तो खूब होती है, लेकिन जमीनी स्तर पर सफलता नदारद है।
जामोतरा में ग्रामीण अपनी और अपनी संपत्ति की सुरक्षा के लिए रातभर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं, क्योंकि उन्हें पुलिस पर भरोसा नहीं रहा। जो लोग व्यापार के लिए गांव से बाहर जाते हैं, वे अब डर के साए में जी रहे हैं।आज, 26 जुलाई 2025: जावाल में दिनदहाड़े चोरी – पुलिस अधिकारियों की फोन पर चुप्पी और एसपी के बेबुनियाद दावेसिरोही जिले में चोरों का दुस्साहस अब चरम पर पहुंच गया है, और वे दिनदहाड़े वारदातों को अंजाम देने लगे हैं।
कल, शनिवार, 26 जुलाई, 2025 को जावाल के मोतीलाल के घर में दिनदहाड़े हुई चोरी ने एक बार फिर पुलिस की लचर कार्यप्रणाली को उजागर किया है। यह घटना साबित करती है कि चोरों के मन में अब पुलिस का कोई खौफ नहीं बचा है।
इस ताजा वारदात के बाद जब हमारे रिपोर्टर सुनील सिंघानिया ने स्थानीय पुलिस चौकी के प्रभारी कानाराम सिरवी से संपर्क करने का प्रयास किया, तो उनका फोन ही नहीं उठा। यह चौंकाने वाला रवैया दर्शाता है कि पुलिस अधिकारी शायद सवालों का सामना करने से बच रहे हैं। जब चौकी प्रभारी से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो सुनील सिंघानिया ने बरलूट थानाधिकारी जितेंद्र सिंह को फोन लगाया, जिनके अधिकार क्षेत्र में जावाल चौकी आती है, लेकिन उन्होंने भी हमारा फोन नहीं उठाया। पुलिस के इन जिम्मेदार अधिकारियों की यह अभूतपूर्व खामोशी सीधे तौर पर यह संकेत देती है कि या तो उनके पास इन बढ़ती वारदातों का कोई जवाब नहीं है, या वे जानबूझकर सवालों और जवाबदेही से बचना चाहते हैं। जनता की सुरक्षा के लिए नियुक्त अधिकारियों का यह गैर-जिम्मेदाराना आचरण अस्वीकार्य है।
सिरोही जिला एसपी पायरे लाल के जवाब: जमीनी हकीकत से कोसों दूर ,इस बदहाल कानून-व्यवस्था पर जब हमारे रिपोर्टर सुनील सिंघानिया ने सिरोही के पुलिस अधीक्षक (एसपी) पायरे लाल से संपर्क करके सवाल पूछा कि
– “सर, अब जावाल में दिनदहाड़े चोरी हुई है, तो क्या आपको लगता है कि जिले में कानून व्यवस्था नियंत्रण में है?
“इस पर जिला एसपी साहब पायरे लाल का जवाब था: “यह बिल्कुल नियंत्रण में है।
“एसपी साहब का यह बयान जमीनी हकीकत से कोसों दूर और हास्यास्पद प्रतीत होता है। जब ग्रामीण लगातार चोरियों से त्रस्त हैं, रातें जागकर बिताने को मजबूर हैं, और पुलिस अधिकारी फोन उठाने तक से कतरा रहे हैं, तब कानून-व्यवस्था को ‘बिल्कुल नियंत्रण में’ बताना जनता के साथ एक मज़ाक से कम नहीं है। यह पुलिस की कार्यप्रणाली के प्रति जनता के विश्वास को और कम करेगा।
जब पत्रकार सुनील सिंघानिया ने आगे सवाल पूछा कि,
– “सर, हाल ही में लगातार 3 बड़े गांवों में मंदिरों में चोरी हुई, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई?
“इस पर एसपी ने अपने दायित्व को समझते हुए जवाब दिया: * “हम सभी संबंधित घटनाओं की पूरी जानकारी मंगवा रहे हैं।” * “स्थिति का गहराई से एनालिसिस कर एक प्रभावी एक्शन प्लान तैयार करेंगे।” * “जिन इलाकों में लगातार चोरी की वारदातें हुई हैं, उन पर विशेष नजर रखी जाएगी और गश्त बढ़ाई जाएगी।” * “एक समर्पित टीम का गठन किया जा रहा है, जो इन सभी घटनाओं में शामिल आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और चोरी हुए सामान की बरामदगी के लिए युद्धस्तर पर प्रयास करेगी।
“एसपी साहब के इन बयानों से यह तो स्पष्ट होता है कि वे स्थिति को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न कदम उठाने की बात कर रहे हैं, लेकिन अब सवाल यह उठता है कि क्या ये कदम जमीनी स्तर पर अपराधियों पर लगाम लगा पाएंगे और जनता में विश्वास बहाल कर पाएंगे।
“अविश्वास की गहरी खाई, कब जागेगा प्रशासन? “
जिस तरह से एक के बाद एक चोरियां हो रही हैं और पुलिस प्रशासन की तरफ से कोई ठोस प्रतिक्रिया या कार्रवाई नहीं दिख रही है, उससे जनता का पुलिस पर से भरोसा पूरी तरह से उठ चुका है। मनोरा के ग्रामीणों ने तो पहले ही चेतावनी दे दी है कि यदि तीन दिनों के भीतर चोरियों का खुलासा नहीं होता तो वे आमरण अनशन पर बैठेंगे। जामोतरा और जावाल में, ग्रामीण अपनी और अपनी संपत्ति की सुरक्षा के लिए रातभर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं, क्योंकि उन्हें पुलिस पर भरोसा नहीं रहा। जो लोग व्यापार के लिए गांव से बाहर जाते हैं, वे अब डर के साए में जी रहे हैं।यह स्थिति किसी भी सभ्य समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है। जब पुलिस के जिम्मेदार अधिकारी, जिन्हें जनता की सेवा और सुरक्षा के लिए नियुक्त किया गया है, सवालों का जवाब देने से भी बचें और अपना फोन न उठाएं, तो यह दर्शाता है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति कितनी बदहाल हो चुकी है। क्या सिरोही में पुलिस केवल कागजी कार्रवाई और खानापूर्ति तक ही सीमित रह गई है? क्या अपराधियों को अब खुली छूट मिल गई है कि वे जब चाहें, जहां चाहें वारदात को अंजाम दे सकें?इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी कमी पुलिस के उच्चाधिकारियों की जवाबदेही में दिख रही है। आखिर क्यों उनके अधीनस्थ अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से भाग रहे हैं? क्या उच्चाधिकारियों को इन लगातार हो रही वारदातों और अपने अधिकारियों की उदासीनता का संज्ञान नहीं लेना चाहिए? यह सिर्फ चोरियों का मामला नहीं है, बल्कि यह कानून-व्यवस्था के ध्वस्त होते ढांचे और जनता के संवैधानिक अधिकारों के हनन का भी मामला है।समय आ गया है कि शीर्ष पुलिस अधिकारी इस गंभीर स्थिति को पहचानें। उन्हें न केवल मोतीलाल के घर हुई ताजा चोरी सहित सभी लंबित चोरियों का तत्काल और प्रभावी खुलासा करना चाहिए, बल्कि लापरवाह और गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। सिरोही जिले की जनता भयमुक्त माहौल में जीने का अधिकार रखती है, और यह सुनिश्चित करना पुलिस प्रशासन का कर्तव्य है। आखिर कब तक सिरोही के लोग चोरों के आतंक और पुलिस की इस अकर्मण्यता के बीच जीने को मजबूर रहेंगे? यह सवाल अब पूरे जिले में गूंज रहा है, और इसका जवाब जल्द मिलना चाहिए।
(रिपोर्टर : सुनील सिंघानीया जावाल , V24 NEWS CHANNEL)


