अंधा बना सकती है ग्लूकोमा व्याधि

ग्लोबल अस्पताल ने रैली निकाल किया जागरूक

विश्व ग्लूकोमा सप्ताह के अंतर्गत हुआ कार्यक्रम

माउंट आबू, 10 मार्च।

(किशनलाल)

विश्व ग्लूकोमा सप्ताह के अंतर्गत ग्लूकोमा रोकथाम जनजागृति रैली रविवार को ग्लोबल अस्पताल व इनरव्हील क्लब माउंट आबू के संयुक्त तत्वावधान में शहर के प्रमुख स्थानों से निकाली गई। होटल हिलॉक से आरंभ हुई रैली कोलडिपो, बस स्टेंड, रोटरी सर्कल, चाचा म्युजियम चौक, धडाधड महादेव मंदिर, वाल्टर तिराहा, नक्की चौक, भारत माता नमन स्थल, नक्की परिक्रमा पथ, कानुडा घाट, दादी प्रकाशमणि चौक से होते हुए पांडव भवन परिसर पहंुची।ग्लूकोमा जनजागृति रैली को संबोधित करते हुए ग्लोबल अस्पताल की नेत्र रोग, ग्लूकोमा विशेषज्ञ डॉ. शालिनी ने कहा कि प्रकृति की अनुपम देन आंखों को सदा निरोगी, आभायुक्त व सही सलामत बनाए रखने के लिए निरंतर सजग रहने की जरूरत है। नेत्र व्याधियों के अंतर्गत मोतियाबिंद, शल्य चिकित्सा पद्धति के विभिन्न प्रकार जैसे फेको, एम. एस. आई. सी.एस, फैल व लेजर सर्जरी समेत विभिन्न व्याधियों की हाई डेफिनेशन सर्जिकल वीडियो के माध्यम से जीवंत प्रदर्शन करते हुए जानकारी दी कि ग्लूकोमा, डायबिटिक रेटिनोपैथी आदि खतरनाक व्याधियां हैं जिनका समय पर इलाज न करवाने की स्थिति में आंखों का दिमाग से संपर्क कटने की संभावना बढ़ने पर व्यक्ति पूर्णतः अंधा भी हो सकता है। इनरव्हील क्लब अध्यक्ष श्रीमती गीता अग्रवाल ने कहा कि बच्चों के चश्मे के नंबर व भैंगेपन को कतई हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर सही उपचार नहीं दिए जाने से भविष्य के लिए भारी परेशानियों का सबब बन सकता है।ग्लोबल अस्पताल निदेशक डॉ. प्रताप मिढ्ढा कहा कि  आंखों में हमेशा एक्वियस हयमर नामक एक तरल पदार्थ बहता रहता है। यह तरल पदार्थ आंखों के लेंस, आयरिस, कार्निया को पोषण देता है। इसको प्रवाहित करने वाले नाजुक जाल में यदि कोई रुकावट आती है तो उसे सही जगह तक ले जाने वाली नस में भी रूकावट आ जाने से आंखों में इंट्रा आक्सुलर प्रेशर बढ़ जाता है जिससे ऑप्टिक नर्व को रक्त पहुंचाने वाली रक्त वाहिका को नुकसान पहुंचाने लगता है। यदि इसका इलाज शीघ्रता से नहीं किया जाए तो दिमाग से आंखों का संपर्क खत्म हो जाने पर व्यक्ति पूरी तरह अंधा हो जाता है। ऑप्टिक नर्व में हुए नुकसान की भरपाई संभव नहीं होती। डॉ. वैभव विषाल ने कहा कि ग्लूकोमा बहुत हद तक आनुवांशिक होता है। मायोपिया, मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों में भी ग्लूकोमा होने की आशंका ज्यादा होती है। वे लोग जिनकी आंखों में आंतरिक दबाव असामान्य रूप से अधिक हो उन्हें भी यह बीमारी होने की पूरी पूरी संभावना होती है। लंबे समय से स्टेरॉयड या कॉर्टिजोन का उपयोग करने वाले भी इस बीमारी का शिकार हो सकते हैं। आंखों की चोट भी इसका कारण हो सकती है। डॉ. पंकज गुप्ता ने कहा कि ग्लूकोमा के कुछ अप्रत्यक्ष लक्षण भी होते हैं। जैसे सामान्य से कम दिखना, चश्मे का नंबर बार-बार बदलना, प्रकाश के चारों ओर इंद्रधनुष मंडल दिखना। ग्लूकोमा का पता चलने के बाद डॉक्टर कई प्रकार की जांच कर उसके प्रकार, उससे हुई क्षति का पता लगाते हैं। आंखों में इंट्रा ऑक्युलर प्रेशर जांचने के लिए टोनोमेट्री टेस्ट, दृष्टि क्षेत्र का परीक्षण करने के लिए पेरिमेट्री टेस्ट, गोनियोस्कॉपी से आंखों के ड्रेनेज एंगल का निरीक्षण किया जाता है।लायंस क्लब अध्यक्ष सुनील आचार्य ने कहा कि आंखें अनमोल हैं। समय रहते ग्लूकोमा से बचने के लिए साल में एक बार अपनी आंखों की जांच अवश्य करवानी चाहिए। इस अवसर पर पालिका में मनीष अग्रवाल, किरण कष्यप, दिनेश सिंह, संदीप सिंह, श्रमिष्ठा सेन, श्रद्धा सवानी, विजय खन्ना समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

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