राजस्थान : आबूरोड,( सिरोही)

पोष शुक्ल प्रतिपदा पर ‘डूसकी, पर्व की परंपरा हुई जीवंत,

कम ऊंचाई पर उड़ने वाली ब्लैकबर्ड को धावको ने सुरक्षित रूप से अपने कर कमलो में लिया-थाम ।

प्रतिवर्ष पोष शुक्ल प्रतिपदा और उसके बाद की तिथियां में आदिवासी पहाड़ी क्षेत्र के गांवो में परंपरागत रूप से मनाया जाने वाला “डूसकी,पर्व अपने अंदाज में मनाया जाता है।

शुक्रवार को कई इलाकों में इस पर्व की धूम देखी गई, भौगोलिक रूप से पहाड़ियों की तलहटी में बसे आबू रोड के रणोरा गांव में सुबह बाल धावको ने दौड़कर ‘डूसकी, पक्षी को अपने हाथों में सुरक्षित रूप से थाम लिया और उसके बाद में परंपरा अनुसार हल्दी आदि की परंपरा का निर्वहन कर अपने गांव के घर-घर पहुंचे जहां पर वृद्ध जनों और सभी परिवार के सदस्यों ने स्वागत के बाद स्वास्थ्य और खुशहाली का वरदान की कामना की। साय: कालीन आगामी वर्ष के भविष्यवाणी देखने की परंपरा के साथ डूसकी चिड़िया को गगन तले वातावरण में उन्मुक्त छोड़ दिया।

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