*महर्षि वाल्मिकी मनुष्य की संभावनाओं का इतिहास है : लोढ़ा*

– _नगर पालिका प्रशासन की ओर से दादावाडी के सामने निर्मित करवाए गए रामायण के रचियता महर्षि वाल्मिकी उद्यान व वाल्मिकीजी की प्रतिमा का विधायक ने किया लोकार्पण_

*शिवगंज, राजस्थान (हरीश दवे),

शहर के दादावाडी के सामने नगर पालिका प्रशासन की ओर से विधायक संयम लोढ़ा के प्रेरणा से करीब 15 लाख रूपए की लागत से निर्मित करवाए गए रामायण महाकाव्य के रचियता महर्षि वाल्मिकी उद्यान व उसमें स्थापित की गई रामायण लिखते वाल्मिकीजी की भव्य प्रतिमा का रविवार की शाम को मुख्यमंत्री सलाहकार विधायक संयम लोढ़ा ने समारोह पूर्वक लोकार्पण किया।

इस अवसर पर आयोजित समारोह की अध्यक्षता पालिकाध्यक्ष वजींगराम घांची ने की। विशिष्ठ अतिथि के रूप में ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रताराम देवासी, अधिशासी अधिकारी ललितसिंह देथा, पार्षद गीता देवी एवं सहवृत सदस्य श्रीमती विनीता वाघेला उपिस्थत थे।महर्षि वाल्मिकी की मूर्ति एवं उद्यान का फीता काटकर लोकार्पण करने के बाद आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए विधायक लोढ़ा ने कहा कि महर्षि वाल्मिकी मनुष्य की संभावनाओं का इतिहास है। कुदरत ने प्रत्येक मनुष्य को एक क्षमता व चेतना दी है, जिसके जागृत होने पर वह क्या कर सकता है उसका वाल्मिकीजी एक उदाहरण है। विधायक ने कहा कि महर्षि वाल्मिकी का जन्म एक महादलित परिवार में हुआ। हमारे वेदों में भी कहा गया है कि मनुष्य जन्म से नहीं बल्कि अपने कर्म से महान होता है। महर्षि वाल्मिकी की जब चेतना जाग़त हुई तब उन्हाेंने रामायण जैसा महाकाव्य लिख दिया। जिसे आज घर घर में पूजा व पढा जाता है। यह मनुष्य की क्षमता उसका कर्म है। कर्म से व्यक्ति के लिए कुछ भी करना संभव है।

विधायक ने कहा कि मनुष्य ही संसार के सभी प्राणियों में सर्वश्रेष्ठ है, हमें यह समझने की आवश्यकता है। लेकिन हम तुच्छ बातों में पडकर छोटे व कमजोर हो जाते है। विधायक लोढ़ा ने कहा कि हमारे देश में हजारों साल से प्रभावशाली लोगों ने कमजोर का शोषण किया है। लेकिन मनुष्य ने ही उस शोषण के खिलाफ आवाज उठाई है। हमारे महापुरूषों ने समाज में व्याप्त पाखंड के खिलाफ उन्होंने लडाई लडी है। लोढ़़ा ने कहा कि हमारा देश एक हजार साल गुलामी में रहा है।मुगलकाल के दौरान भी इस देश में धर्म की ध्वजा को झुकने नहीं दिया। भक्तिकाल के दौरान ऐसे कई संत महापुरूष हुए जिन्होंने सनातन का परचम लहराया। इन महापुरूषों ने हमेशा लोगों को जागृत करने का काम किया। विडम्बना है कि आज भी लोगों के दिमाग में ऊंच नीच का कचरा बाहर नहीं निकल पाया है। आज भी लोग जन्म के आधार पर खुद का बडा मानते है। उन्होंने नई पीढी से आह्वान किया कि उन्हें समता मूलक समाज की स्थापना के लिए जागृत होना चाहिए। विधायक ने कहा कि महापुरूषों व महाकवियों ने जो ग्रंथों व महाकाव्यों में जितना लिखा है उसे ही अपना ले तो हमारे जीवन में बहुत बडा बदलाव लाया जा सकता है।

इस मौके पर उन्होंने नगर पालिका प्रशासन की सराहना करते हुए कहा कि इस कार्यकाल के दौरान पालिका प्रशासन ने शहर के प्रमुख मार्गो व चौराहों पर महापुरूषों की मूर्ति स्थापित करवाई है ताकि हमारी नई पीढी को इनसे प्रेरणा मिल सकते। उन्होंने कहा कि हालाकि यह कार्य पहले भी हो सकते थे, मगर इसके लिए भी एक सोच होनी आवश्यक है। समारोह को पालिकाध्यक्ष वजींगराम घांची सहित अधिशासी अधिकारी ललितसिंह देथा, सहवृत सदस्य श्रीमती विनीता वाघेला ने भी संबोधित किया। *विधायक का 21 किलो के हार से किया स्वागत* इस अवसर पर वाल्मिकी समाज की ओर से विधायक संयम लोढ़ा का 21 किलो का हार पहनाकर व साफापोशी कर स्वागत किया। इस अवसर पर पार्षद नारायणलाल परिहार, प्रकाश मीना, हबीब शेख, कस्तुर घांची, राजेन्द्रसिंह, अल्पेश माली, शेषमल गर्ग, सहवृत सदस्य अरविंद परारिया, महेन्द्र राठौड, राजेन्द्र कुमार माली, सीमा गहलोत, बलवीरसिंह सहित कई प्रबुद्धजन उपिस्थत थे।

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