सिरनवा की प्रकृति ओर पर्यावरण को नष्ट कर यह कैसा विकास?

विकास की परमिशन में पेड़ कटे अब झोप बुझ नालो व तालाब से छेड़खानी,

झोप व बुझ नाले पर जमा मिट्टी,मलबा,व कचरा भारी बारिश में कर सकता नुकसान

सिरोही(हरीश दवे),

सिरोही नगर पालिका नगर परिषद पेराफेरी बेल्ट बन गई।नाम और बजट बढ़ गया तो उस अनुरूप विकास में बजट खर्च नियोजन का भी महत्व बन गया जिसके सदुपयोग,दुरुपयोग पर चर्चा बेमानी है क्यो की सुनवाई का अभाव है? पर केंद्र व राज्य सरकार पर्यावरण ,प्रकृति, नदी नाले,तालाब ,बावडिया बचाने को संकल्प बद्ध है व करोड़ो रूपये खर्च करती है।पर सिरोही में विकास के बहाने अलग ही विनाश लीला रची जा रही है।पूर्व में एलएनटी के 4 लेन व सुरंग में अवेद्ध ब्लास्टिंग से सिरनवा की पहाड़ी कमजोर व बहाव क्षेत्र झोप बुझ,निडोरा आवक अवरुद्ध हुए।जिसमे निडोरा तालाब के मार्ग को सुनियोजित तरीके से बन्द करवाया और अब ग्रहण सिटी के प्रमुख तालाब लाक़ेलाव व कालकाजी तालाब,अखेलाव व मानसरोवर के अस्तित्व पे पड़ने वाला है ।

भले विधायक संयम लोढा वहा कालकाजी तालाब फ्रंट पार्क में बढ़िया पर्यटन धाम विकसित करने का भाव रखते हो।पर गत दिनों विजय पता का से बारी घाटा तक सड़क चौड़ा करने के नाम सेकड़ो वृक्ष जमींदोज हुए जिससे पर्यावरण पर गहरा असर पड़ा लेकिन जिन तालाबो के आवक मार्ग झोप बुझ में सड़क निर्माण कार्य के दौरान तालाब व आवक मार्ग की भूमि पर जिस प्रकार निर्माण सामग्री ओवर फ्लो मार्ग व तालाब में नगर परिषद प्रशाषन की अनदेखी से पुनः डंपिंग यार्ड बन रहा है जिससे जल बिरादरी व पर्यावरण प्रेमियों में गहरा रोष है।

नगर परिषद ने इंदिरा रोजगार शहरी योजना का प्रारंभ जिस अग्नि शमन केंद्र के सामने कर लाखो रुपये के मानव श्रम का उपयोग किया वहा जैसे कोई भारी काम होने वाला हो। इस बाबत सहायक अभियंता भरत पुरोहित से बात की तो उन्होंने कहा की पीडब्ल्यूडीडी का काम चल रहा है।जबकि यह पीएब्लूडी ठेकेदार व सिस्टम के साथ तीनो तालाब के जल आवक अवरोधकों के हितों की पूर्ती करने की कोशिश है।

गत वर्ष जिला बिरादरी के मोहन लाल माली के दर्जनों बार कहने के बावजूद ओवर फ्लो का पानी रोका।और सरकारी व्यय बाई पासरॉड के तालाब पर हुआ पर नगर का मलबा यही जमा होता रहा और अब भारी बारिश के अंदेशे में नगर परिषद झोप बुझ नाले व तालाब में डाली जा रही मिट्टी व निर्माण सामग्री में अति वृस्टी की सूरत में उतपन्न स्तिथि की जिम्मेवारी कब तय करेगी।

क्या विकास के नाम पेड़ कांट अब जल आवक मार्गो व तालाब की भूमि से भी निडोरा,दूधिया,धंधेला,व बावड़ियों की तरह कब्जो को महत्ब दिया जाएगा?

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