वराडा , सिरोही।

*हनुमान को गुरु मानकर किसी भी कार्य की शुरुआत करें, सफल जरुर होंगे- संयम लोढा*

*वराडा में हनुमान जयंती पर आयोजित मेले में विधायक संयम लोढा ने शिरकत की*

सिरोही(हरीश दवे),

विधायक संयम लोढा ने कहां कि हर माता-पिता की चाहत होती है उनकी संतान श्रेष्ठ होकर शीर्ष तक पहुंचे। समय रहते बच्चों के लिए कोई योग्य गुरु ढूंढ़ दीजिए। वे वहीं पहुंच जाएंगे, जिस मुकाम पर आप उन्हें देखना चाहते हैं। हालांकि श्रेष्ठ गुरु मिल जाना भी इस दौर की बड़ी चुनौती है। तुलसीदासजी ने श्री हनुमान चालीसा की सैंतीसवीं चौपाई, ‘जै जै जै हनुमान गोसाई कृपा करहुं गुरुदेव की नाई’ लिखकर इस चुनौती को बहुत आसान कर दिया है। हनुमानजी को योग्य गुरु और हनुमान चालीसा को मंत्र मान लीजिए। सफल कैसे हुआ जाए और सफलता मिल जाने के बाद क्या किया जाए यह हनुमानजी से अच्छा कोई नहीं सिखा सकता। हनुमान जी को गुरु मानकर किसी भी कार्य की शुरुआत करेंगे तो सफल जरुर होंगे। यह बात विधायक संयम लोढा ने हनुमान जयंती पर वराडा हनुमान मंदिर पर आयोजित आयोजित मेले के दोरान उपस्थित लोगो को सम्बोधित किया। विधायक संयम लोढा ने कहा किमानव जीवन की पहली पाठशाला परिवार होती है। कोई बच्चा माता.पिता या परिवार के बड़े-बुजुर्गों की अंगुली पकडक़र ही दुनियादारी देखने और उसे समझने की शुरुआत करता है। लेकिन इस तथ्य को भी नहीं भुला सकते कि माता-पिता या परिवार से प्राप्त शिक्षा सफलता की सीढियां तो दिखा सकती हैं परंतु लक्ष्य तक पहुंचने के लिए कुछ और भी चाहिए। बिना सही मार्गदर्शन के केवल ज्ञान या जानकारी के बूते कामयाबी केशीर्ष तक नहीं पहुंचा जा सकता। यह मार्गदर्शन सिर्फ गुरु ही दे सकते हैं। लोढा ने कहां कि समय रहते बच्चों के लिए कोई योग्य गुरु ढूंढकर उसे अच्छे मुकाम तक पहुंचाये। श्रेष्ठ गुरु मिल जाना भी इस दौर की बड़ी चुनौती गुरु रूप में उनकी जो कृपा बरसेगी वह आपका जीवन बदल देगी।कहा जाता है मानव जीवन की पहली पाठशाला परिवार होती है। सच भी है, कोई बच्चा माता-पिता या परिवार के बड़े-बुजुर्गों की अंगुली पकड़कर ही दुनियादारी देखने और उसे समझने की शुरुआत करता है। लेकिन, इस तथ्य को भी नहीं भुला सकते कि माता-पिता या परिवार से प्राप्त शिक्षा सफलता की सीढ़ियां तो दिखा सकती हैं परंतु लक्ष्य तक पहुंचने के लिए कुछ और भी चाहिए। बिना सही मार्गदर्शन के केवल ज्ञान या जानकारी के बूते कामयाबी के शीर्ष तक नहीं पहुंचा जा सकता। यह मार्गदर्शन सिर्फ गुरु ही दे सकते हैं। बात महान दार्शनिक अरस्तू की हो या स्वामी विवेकानंद की, इनके समग्र दर्शन और व्यक्तित्व के पीछे गुरु कृपा का आलोक ही काम कर रहा था।

स्वामी विवेकानंद ने तो स्वयं ही स्वीकार किया था कि यदि गुरु रूप में रामकृष्ण परमहंसजी नहीं मिले होते तो मैं साधारण नरेंद्र से ज्यादा कुछ नहीं होता।

कार्यक्रम के लाभार्थी शांतिलाल माली सवना, शंकर लाल माली गोपाल माली, बसंत पुरोहित वराड़ा, प्रवीण पुरोहित, टाइगर अशोक पुरोहित, बसंत लोहार इंद्रमल अग्रवाल, पूर्व पीसीसी सदस्य हिम्मत सुथार, पुनीत अग्रवाल जावाल, जावाल नगर पालिका अध्यक्ष कानाराम भील, सिरोही ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष तेजाराम मेघवाल, रतनलाल प्रजापत मौजूद रहे।

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