आदि शंकराचार्य ने धर्म के माध्यम से राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया- संयम लोढा ।
सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथामृत ज्ञान यज्ञ महोत्सव का समापन
सिरोही, (हरीश दवे)
विधायक संयम लोढा ने कहां कि आदि शंकराचार्य ने धर्म के माध्यम से राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया है। इस भारत भूमि में अलग अलग धर्मो में खुद को प्रमाणिक करने की होड मची हुई थी उस वक्त 8 वर्ष की आयु आदिशंकराचार्य में केरल से अपना घर छोडा और वो भारत वर्ष के पहले व्यक्ति है जिन्होंने उस समय में दो बार भारत वर्ष की पैदल यात्रा की। सम्पूर्ण राष्ट्र में सनातन धर्म को फिर प्रतिष्ठित किया, चारो दिशाओं में पीठ की स्थापना की। लोढा कालंद्री में श्री गोपालकृष्ण गौशाला की तरफ से दंडी स्वामी दयानंद सरस्वती के सानिध्य में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथामृत ज्ञान यज्ञ महोत्सव को संबोधित कर रहे थे।विधायक संयम लोढा ने कहां कि यह आयोजन गौ सेवा के निमित्त है। गहलोत सरकार ने गौवंश का अनुदान बढाया। सरकार ने गौवंश का अनुदान 32 से बढाकर40, 16 से बढाकर 20 रूपये किया। आंकडे सामने है 5 साल भाजपा की सरकार रही है लेकिन गौवंश का अनुदान नही बढाया गया। हमने गौशालाओं का अनुदान तीन महीनें से बढाकर 9 माह किया। लोढा ने कहां कि बच्चों को बचपन से ही संस्कार देना शुरू कर देनी चाहिए ताकि वे संस्कारवान बन सकें। बचपन में दिया गया संस्कार बच्चे कभी भूल नहीं सकते। बच्चों की पहली गुरु मां होती हैं। वह चाहे जिस रूप में ढाले। चाहे तो शिवाजी जैसा बना देए चाहे तो डाकू बना दे। हमारे बच्चे संस्कारवान बने यह हर माता पिता चाहते है। उन्हें संस्कारवान बनाना हमारा ही दायित्व है। कथा वाचक अवधेशदास मिश्रा एवं भागवत भूषण हरिद्वार ने कहां कि श्रीमद्भागवत कथा पुराण मनुष्य को भवसागर से तार कर देता है। उकहा कि जो जीव श्रीमद्भागवत कथा पुराण का श्रवण करता है उसका अंत: करण शुद्ध हो जाता है व तीन प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं। सात दिनों की कथा सुनना तभी सार्थक माना जाता है, जब हम भगवान द्वारा बताए गए रास्तों पर चलते हैं। यह कथा मनुष्य को इस भवसागर से तार देने वाली है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में सदैव गुरु बनाना चाहिए। परमपिता परमात्मा की बनाई हुई सभी वस्तुओं से हमें कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। श्रीमद्भागवत पुराण हम सभी को जीवन यापन करना सिखाती है। मनुष्य को संतोषी होना चाहिए।इस अवसर पर उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न बाल लीलाओं का वर्णन किया। 25 दिसम्बर से आयोजित इस भागवत कथा में सैकडो की संख्या में गांव के महिला पुरूषों ने भाग लिया। आज समापन के दौरान आर्कषक झांकिया संजाईगई। कार्यक्रम की व्यवस्था श्री गोपाल कृष्ण गौशाला के सदस्यों ने सम्भाली।

