पूज्य संतोष सागर जी के मुखारविंद से चल रही भागवत कथा का समापन।

सिरोही, (हरीश दवे)

ओमकार सेवा संस्थान चेरीटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित सनातनधर्म यात्रा के 27 वें पड़ाव के अंतर्गत सनातनधर्म यात्रा आयोजन समिति सिरोही के तत्वावधान में पूज्य भाई श्री संतोष सागर जी महाराज ने प्रथमेश गार्डन में श्रीमद भागवत कथा के सप्तम दिवस बोलते हुए कहा की हरि अनंत हरि कथा अनंता यानी भगवान की कथा अनंत है इसे 7 दिन में तो क्या 7 वर्ष में नहीं कहा जा सकता।भगवान श्री कृष्ण को अक्रूर जी मथुरा ले जाने आए। 11 वर्ष की उम्र में वृंदावन छोड़ कर मथुरा गए और कालयवन पीड़ हाथी,चाणूर और कंश मामा का वध किया। भगवान ने 11 वर्ष की उम्र के बाद कभी माखन नही खाया कभी मुरली नही बजाई। भगवान ने उसके बाद पूरी उम्र मानव कल्याण को समर्पित किया। भगवान गुरु संदीपनी ऋषि के आश्रम में गए 64 दिनों में सारी विद्याएं प्राप्त की। महाराज ने कहा की भगवान ने कब्जा का उद्धार किया। 3 जगह से टेढ़ी कब्जा को सर्वांग सुंदर बनाया यानी उसके काम क्रोध लोभ की गांठे खोल दी। भगवान तन का नहीं मन का सौंदर्य देते है। शारीरिक सौंदर्य कुछ समय का होता है पर मन का सौंदर्य सदा रहता है। उद्धव चरित्र सुनाते हुए भाई श्री ने कहा भगवान कृष्ण ने उद्धव जी के ज्ञान के घमंड को तोड़ने के लिए गोपियों को समझने के लिए वृंदावन भेजा। गोपियों भक्ति की पराकाष्ठा देख कर उद्धव जी की ज्ञान का घमंड चूर चूर हो गया और 1 दिन की लिए गए उद्धव 6 महीने वृंदावन की गलियों में राधा राधा करते घूमते रहे। भगवान भक्ति का नाता मानते हैभाई श्री ने भगवान के विवाह की कथा का श्रवण कराया।भगवान कृष्ण सुदामा की कथा सुना कर महाराज श्री ने सब की आंखों को नम कर दिया।प्रातः कैप्टन नरेंद्र पाल सिंह के यजमानत्व में प्रथमेश गार्डन में विश्व कल्याण हेतु आयोजित यज्ञ की आज पूर्णाहुति की गई जिसमें विपिन अग्रवाल, मदन सिंह , डॉक्टर जगदीश शर्मा ओंकार सिंह उदावत राजेंद्र सिंह राठौड़ सपत्नीक द्वारा आहुतियां दी गई । कथा विश्राम के बाद नरेंद्र पाल सिंह एवं शांतिलाल माली सवना द्वारा सेंकड़ों भक्तों के लिए भंडारे का आयोजन किया गयाआरती एवं प्रसाद के यजमान छतर सिंह, विपिन अग्रवाल, मदन सिंह सिंदल, शांतिलाल माली सवना वाले, सुनीता स्व बलवंत सिंह चौहान, कुसुम काशीवा, मगन माली एम बी फ्रूट, गायत्री देवी शर्मा, , मीरा शर्मा, नटवर अवस्थी, हमीर सिंह राव, कुंदन सिंह देवड़ा, ओंकार सिंह उदावत, राजेंद्र सिंह राठौड़,, अथर्व राज, घनश्याम मिश्रा, सरिता मिश्रा, शंकर लाल माली, भगवतीलाल ओझा, करण सिंह डाबी फौजी, मोहन लाल माली, उत्तम सिंह, राजेंद्र सिंह नरूका, राम लाल मूलचंद खंडेलवाल, जगदीश सिंह गुर्जर, प्रकाशमाली गौशाला, चंद्रभान मोटवानी, राजबाला गुर्जर, नारायण सिंह एवं सैकड़ों भक्त सहित माताएं बहनें एवं श्रोता मौजूद रहे ।

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