शांति की अनुभूति कराता है ओम शान्ति का मंत्र – स्वामी ज्ञानानंद महाराज ।
रिपोर्ट , किशन दहिया
माउंट आबू / सिरोही ,
अखिल भारतीय गरीबदास साधु महापरिषद राष्ट्रीय महासचिव, हरिद्वार रामनिकेतन परमाध्यक्ष स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि ओम शांति के महामंत्र की गहराई में जाने से असीम शांति का अनुभव किया जा सकता है। इसके लिए स्वयं को आत्मा समझ परमात्मा से संबंध जोडकर अपने अंदर मौजूद अलौकिक शक्तियां जागृत होती हैं। जिससे संताप, क्रोध, अनावश्यक कामनाओं के साथ विभिन्न प्रकार की मानसिक व्याधियों की अग्नि से पीड़ाग्रस्त मानव समुदाय चित को शांत कर सकता है। साधक को अपनी चेतना को विकसित करने की ओर अपना ध्यान बनाये रखना चाहिए। असफलताओं के प्रति साधक की जागरूकता ही अपना उदेश्य प्राप्त करने का पुरूषार्थ है। वे मंगलवार को प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय पांडव भवन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ज्ञान का दान कर मानवीय मूल्यों का विकास करना भागीरथ कार्य है। ब्रह्माकुमारी संगठन में निराकार शिव परमात्मा द्वारा मन, वचन, कर्म की साधना अतुलनीय है। जिस साधना से न केवल हृदय की शुद्धि होती है बल्कि आत्मा सूक्ष्म मनोविकारों से भी मुक्त होकर पावन बन जाती है। ब्रह्माकुमारी संगठन की संयुक्त मुख्य प्रशासिक बीके शशिप्रभा बहन ने कहा कि पवित्रता के मुख्य स्रोत विश्वकल्याणकारी शिव परमात्मा पूरी दुनिया को पावन बनाने के लिए भारत भूमि में ही अवतरित होते हैं। माउंट आबू के महान तीर्थ से विश्व को एकता के पुनीत सूत्र में पिरोने का कत्र्तव्य ब्रह्माकुमारी संगठन की ओर से सभी धर्मों को एकसाथ लेकर किया जा रहा है।सतगुरु गरीबदास मंदिर हरिद्वार अध्यक्ष स्वामी कमल सागर महाराज ने कहा कि यहां आकर जो शांति की गहन अनुभूति हुई है वह कोई मनुष्य नहीं करवा सकता है। यहां स्पष्ट रूप से स्वयं परमात्मा की उपस्थिति का आभास होता है लेकिन उसके लिए मन की स्वच्छता बहुत जरूरी है। राजयोग एकमात्र ऐसी विद्या है जो मन को स्वच्छ बनाकर जीवन जीने की कला सिखाती है।शिक्षा प्रभाग की उपाध्यक्षा बीके शीलू बहन ने कहा कि राजयोग का नियमित अभ्यास करने से मन में दया, करूणा, परस्पर प्यार, सहानुभूति, सौहार्द की भावनाओं का उदगम होता है। जिससे वसुधैव कुटुम्बम की भावना को भी बल मिलता है।इस अवसर पर कुवैत से आई बीके अरूणा बहन, हरिद्वार से आए बीके सुशील कुमार आदि ने भी विचार व्यक्त किए।

